Sunday, June 5, 2011

ख़ूबसूरत लम्हे

आओ बैठो कुछ देर साथ,
फिर लम्हे ख़ुशी के,
मिले न मिलें।
चंद लम्हों में जी लें सारी जिन्दगी,
फिर ये हसीं पल मिले न मिलें.

Thursday, January 21, 2010

साहिर लुधियानवी

ऐ मेरी जान ! मुझे हैरतों - हसरत से न देख
हम में कोई भी जहानूरो - जहांगीर नहीं
तू मुझे छोड़ के ठुकरा के भी जा सकती है
तेरे हाथों में मेरे हाथ हैं , जंजीर नहीं .

Thursday, November 26, 2009

गोपाल दास नीरज/अब तुम्हारा प्यार भी. -2


अब तुम्हारा प्यार भी मुझको स्वीकार नहीं प्रेयसी!
अश्रु सी है आज तिरती याद उस दिन की नजर में,
थी पड़ी जब नाव अपनी काल तूफानी भंवर में,
कूल पर तब ही खड़ी तुम व्यंग मुझ पर कर रही थीं,
पा सका था पार मैं खूब डूबकर सागर-लहर में,
हर लहर ही आज जब लगाने लगी है पार मुझको,
तुम चलीं देने मुझे तब एक जड़ पतवार प्रेयसी!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको स्वीकार नहीं प्रेयसी!